एक सर्वाइवल सिम्युलेटर के रूप में, इस गेम की सफलता इसके मैकेनिक्स की बारीकियों पर निर्भर करती है। अल्फा टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि खिलाड़ी मध्ययुगीन बर्मिंघम की गलियों में अनडेड प्लेग और भूख-प्यास जैसी चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। डेवलपर्स के लिए यह फीडबैक गेम की कठिनाई और फिजिक्स-आधारित इंटरैक्शन को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अच्छी खबर यह है कि जो लोग इस बार टेस्टिंग का हिस्सा नहीं बन पाए, उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। डेवलपर्स ने संकेत दिया है कि जल्द ही और भी टेस्टिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि God Save Birmingham का अर्ली एक्सेस इसी साल के अंत में PC के लिए प्लान किया गया है।
अभी के लिए, टीम पूरी तरह से बग्स को ठीक करने और गेमप्ले अनुभव को पॉलिश करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। एक इंडी प्रोजेक्ट होने के नाते, कम्युनिटी का इनपुट ही इस गेम को एक साधारण सर्वाइवल गेम से एक गहरे सिमुलेशन अनुभव में बदल सकता है। आने वाले महीनों में हमें इसके विकास और नए फीचर्स के बारे में और अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
